हाथों में किताबें और आंखों में डर; अररिया में 7 फीट पानी के ऊपर बनी चचरी से गुजरकर स्कूल पहुंच रहे मासूम
अररिया के रानीगंज स्थित परसाहाट उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राएं 7-8 फीट गहरे पानी के ऊपर बनी जर्जर बांस की चचरी से होकर स्कूल पहुँचने को मजबू ...और पढ़ें

रानीगंज के उच्च माध्यमिक विद्यालय परसाहाट में सड़क, शौचालय और पेयजल का अभाव; शिक्षकों के सहयोग से बनती है चचरी
HighLights
अररिया में छात्र 7 फीट पानी पर बनी चचरी से स्कूल जाते हैं।
जर्जर चचरी और जलजमाव से हर पल हादसे का खतरा बना रहता है।
स्कूल में पीने का पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं।
संवाद सूत्र, रानीगंज (अररिया)। बिहार में शिक्षा व्यवस्था के दावों और हकीकत के बीच कितना बड़ा अंतर है, इसकी बानगी अररिया जिले के रानीगंज प्रखंड स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय परसाहाट में देखने को मिलती है। यहाँ पढ़ने वाले नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं के लिए रोज स्कूल पहुंचना किसी बड़े जोखिम या अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
बरसात के दिनों में विद्यालय के मुख्य रास्ते पर सात से आठ फीट तक पानी जमा हो जाता है। पक्की सड़क न होने के कारण बच्चे पानी के ऊपर बनी बांस की चचरी के सहारे किसी तरह आवागमन करते हैं। पानी की अत्यधिक गहराई और चचरी की जर्जर स्थिति के कारण हर पल किसी अनहोनी और बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
शिक्षकों के सहयोग से बनती है चचरी
विद्यालय तक पहुंचने का यह चचरी पुल सालों भर रहता है, जिसे शिक्षक आपस में सहयोग कर बनवाते हैं। छात्र बादल कुमार, अंकित कुमार, रवि तथा छात्राएं संथाली खातून व उवैदा खातून ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्हें रोजाना इस खतरनाक चचरी को पार करना पड़ता है।
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किताबें भीगने का रहता है डर
बरसात में जब जलस्तर बढ़ता है, तो चचरी पर संतुलन बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई बार पैर फिसलने से कपड़े और किताबें भी भीग जाती हैं। परेशानी सिर्फ रास्ते तक सीमित नहीं है; स्कूल परिसर में पीने का पानी (चापाकल) और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे विशेषकर छात्राओं को भारी फजीहत झेलनी पड़ती है।
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ग्रामीणों व अभिभावकों ने उठाई स्थायी समाधान की मांग
अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नौवीं से बारहवीं तक के बच्चों को सुरक्षित माहौल देना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। चचरी पुल कभी भी किसी स्थायी रास्ते का विकल्प नहीं हो सकता। पानी के बीच से रोज गुजरना किसी दिन बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।
ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूल के सामने से जलजमाव की निकासी की जाए, स्थायी पक्की सड़क का निर्माण हो और छात्र-छात्राओं के लिए अविलंब स्वच्छ पेयजल व शौचालय की व्यवस्था की जाए।
"विद्यालय तक जाने के लिए सड़क का अभाव है। जल्द ही सड़क का निर्माण कराया जाएगा।"
— अनमोल रजक, मुखिया, परसाहाट
"विद्यालय की इन समस्याओं को लेकर बीईओ (BEO) से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक को आवेदन दिया जा चुका है। विद्यालय के आगे बरसात में करीब सात से आठ फीट तक पानी जमा रहता है। आने-जाने के लिए चचरी ही एकमात्र सहारा है। चापाकल और शौचालय का भी अभाव है। छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षकों को भी प्रतिदिन इन विकट परिस्थितियों से जूझना पड़ता है।"
रूमा कुमारी, प्रधानाध्यापिका, उच्च माध्यमिक विद्यालय परसाहाट