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नेपाल से अररिया तक तस्करी का रास्ता! 18 संवेदनशील पगडंडियों से नशा-हथियारों की खेप, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

Published: Thu, 08 Oct 2026 05:49 AM (IST)

अररिया जिले के भारत-नेपाल सीमावर्ती गांव अंतरराष्ट्रीय तस्करों के सुरक्षित पनाहगाह बन गए हैं, जहाँ से करोड़ों रुपये के अवैध ...और पढ़ें

भारत-नेपाल सीमा पर कच्चे रास्तों का इस्तेमाल तस्कर बिना किसी डर के कर रहे हैं।

भारत-नेपाल सीमा पर कच्चे रास्तों का इस्तेमाल तस्कर बिना किसी डर के कर रहे हैं।

HighLights

  1. भारत-नेपाल सीमा पर अररिया के गांव तस्करों का अड्डा बने।

  2. नशीले पदार्थ, चाइनीज सामान और हथियार दोनों देशों में तस्करी।

  3. एसएसबी और पुलिस लगातार छापेमारी कर रही, कई गिरफ्तारियां हुईं।

अजीत कुमार, फुलकाहा (अररिया)। भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय खुली सीमा पर बसे अररिया जिले के अधिसंख्य गांव इन दिनों अंतरराष्ट्रीय तस्करों के सबसे सुरक्षित पनाहगाह बन चुके हैं।

नरपतगंज और फुलकाहा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत पथरदेवा, कोशिकापुर, मानिकपुर, बबुआन, घुरना, डुमरबन्ना, बसमतिया, बेला, सोनापुर और चकोड़वा जैसे गांव तस्करों के मुख्य 'डंपिंग यार्ड' में तब्दील हो चुके हैं। सरहद पार से नेपाल का सस्ता सामान भारत और भारत का नियंत्रित सामान नेपाल भेजने का यह अवैध धंधा स्थानीय स्तर पर एक बड़े 'पैरेलल व्यापार' का रूप ले चुका है,

जिससे सरकार को हर माह करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।दिन-रात सैकड़ों की संख्या में बाइक व साइकिल सवार 'कैरियर' सुरक्षा बलों की नाक के नीचे से लाखों रुपये का माल इस पार से उस पार पहुंचा रहे हैं।

18 से अधिक सुनसान रास्ते, चाइनीज सामान से लेकर हथियारों की तस्करी का नेटवर्क

पथरदेवा से लेकर बेला तक फैले लगभग 18 से अधिक सुनसान और कच्चे रास्तों का इस्तेमाल तस्कर बिना किसी डर के कर रहे हैं। नेपाल से नशीला पदार्थ शराब, गांजा, चाइनीज अखरोट (400-450/किग्रा), चाइनीज लहसुन, मटर, कुदाल, बेलचा व सौंदर्य प्रसाधन लाए जाते हैं।

इन्हें सीमावर्ती गोदामों में डंप कर फर्जी बिलों के जरिए फारबिसगंज से पिकअप व ट्रकों में लादकर पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा व हाजीपुर भेजा जाता है। वहीं, भारतीय क्षेत्र से स्मैक, ब्राउन शुगर, कोरेक्स कफ सिरप, नशीली सूई, दवाएं, रसायनिक खाद, खाद्यान्न व इलेक्ट्रॉनिक्स सामान नेपाल भेजे जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, इन सुनसान रास्तों से अवैध हथियारों की तस्करी के मामले भी सामने आए हैं।

तस्करों की आपसी गैंगवार और मुखबिरी का खेल, एसएसबी का कड़ा पहरा

तस्करी के इस सिंडिकेट में तस्कर अपने विरोधी गुटों के कैरियरों को पकड़वाने के लिए एक-दूसरे की मुखबिरी भी करवाते हैं, जिससे उनका रास्ता साफ हो जाता है और सुरक्षा बलों को जब्ती का श्रेय मिल जाता है।

यद्यपि एसएसबी 56वीं बटालियन और स्थानीय पुलिस लगातार छापेमारी कर कुंतलों गांजा, गाड़ियां व लाखों रुपये की नकदी बरामद कर रही है, फिर भी खुली सीमा होने के कारण तस्कर नए-नए रास्ते तलाश लेते हैं। पुलिस और एसएसबी अब इन गांवों में चिन्हित ठिकानों और संदिग्ध कैरियरों की सूची तैयार कर उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन चला रही है।

हालिया प्रमुख कार्यवाइयों और बरामदगी की सूची (Two-Column Table Format):

कार्रवाई की तिथि व स्थान जब्ती एवं गिरफ्तारी का विवरण
10 सितंबर (फुलकाहा) पिकअप वैन समेत 5 क्विंटल 18 किलो गांजा जब्त।
19 जुलाई (घुरना) एसएसबी द्वारा 205 किलो गांजा बरामद।
06 जून (घुरना) एसएसबी की टीम द्वारा 178 किलो गांजा जब्त।
05 सितंबर (घुरना) कार से 104 किलो गांजा, ₹6.50 लाख नेपाली करेंसी व चालक गिरफ्तार।
28 अगस्त (घुरना) संयुक्त कार्रवाई में 55 किलो गांजा बरामद।
30 जुलाई (डुमरिया) घर में छापेमारी कर 2 किलो गांजा, ₹10.88 लाख नकद व 2 महिलाएं गिरफ्तार।
06 अगस्त (घुरना) 34 किलो गांजा के साथ एक तस्कर गिरफ्तार।
27 अगस्त (फुलकाहा) बॉर्डर के समीप 29 किलो गांजा लावारिस हालत में जब्त।
03 अक्टूबर & 06 अक्टूबर (मानिकपुर/अन्य) 24 किलो गांजा, 1 तस्कर गिरफ्तार; मक्का लदा ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त।

"सीमा पर तैनात एसएसबी 56वीं बटालियन के जवान तस्करों पर पैनी नजर रखते हैं और लगातार पेट्रोलिंग की जाती है। कहीं भी तस्करी की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई होती है। खुली सीमा (Open Border) का फायदा उठाकर कुछ तस्कर चोरी-छिपे गतिविधियों को अंजाम देते हैं, लेकिन ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई जारी है।"

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— नितिन कुमार गुप्ता, द्वितीय सेनानायक (एसएसबी 56वीं बटालियन, अररिया)